My Legacy

अनुराग

Anurag - अनुराग

ये कहानी एक ऐसे लड़के की है जिसे बचपन में पोलियो ने अपनी जकड में ले लिया था। ये नियति की विडम्बना ही थी कि होनहार व्यक्ति समाज में सामान्य जीवन नहीं जी सकता था I जिसमे उसकी कोई गलती हो। शरीर की अक्षम्यता आदमी को कितना मजबूत बना देता है, ये मैंने अनुराग को देखकर ही जाना I मेरे ही विद्धयालय में पढता था, रोजाना उससे मिलना भी होता और दोस्ती तो बचपन की थी। उसका वो हंसमुख चेहरा, बड़ीबड़ी गोल आँखे और गेहुँआ रंग नाम की अनुरूप पूरा अनुरागी ही था वह। 

 

एक बार हम कुछ दोस्त गेंद तड़ी खेल रहे थे और वो बैठा हम लोगो को देख रहा था मैंने सहानभूति वश पूछ लिया क्या तुम भी खेलोगे ? उसने कहा क्यों नहीं तो फिर खेल शुरू हो गया और वो भी शामिल हो गया। कुछ ही क्षणों में हम सरे दोस्तों के पसीने छूट गए क्या निशाना था उसका एक बार साध गया तो फिर चूक नहीं सकता था और दौड़ भी उसकी अच्छी थी काम से काम मेरे थुलथुल मित्रो से सरपट ही भाग लेता था।  

 

कहानी ज्यादा रोचक इसके बाद हो गई वो हर काम में हमसे बेहतर था और गाहेबगाहे मेरी मदद भी कर दिया करता था। पढाई से तो मेरा दूर दूर तक नाता नहीं था   अक्सर उसके घर पढाई के सिलसिले में जाना होने लगा लिखावट भी उसकी शानदार थी।  

 

उसका पंचर बनाने और खाना खिलाने का कारोबार था।  ढाबे पर तो इतनी भीड़ रहती कि कभी कभी उसके घर जाना दूभर हो जाता।  आज अपनी पढाई पूरी कर अनुराग इंजीनियर बन गया है और मै निरीह लेखक।  

 

कहानी की विरासत मूर्त अनुराग ही है जिसने जाने कितनी मेहनत की होगी अपनी मंजिल को पाने में। 

 

-Dr. Siddharth Singh

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