Fiction

कहना हिन्दी जिन्दा है ….

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मरणसैया पे पड़ी हुई बुढ़ी माँ! दवा लेके आती हुई बेटी, रास्ते मे एक बड़े मुछ वाला व्यपारी बेटी से टकरा जाता है और दवा की बोतल गिर जाती है,
सारा द्रव्य जमीन पर समेटने से भी अब वापस बोतल में नहीं जा सकता और बिना दावा के माँ मर जाएगीं….
माँ की खाँसी थोड़ी कम हुई जब बेटी ने रुई के फाहे से दवा को माँ के मुँह में गिराया । आज कितनी कठनाई से उसने माँ की दवा उठायी थी फैले हुए
उस जमीन से, बेटी की आँखों मे आसुँ आ गए उस दिन को याद कर के जब माँ कमाती थी बेटी स्कूल जाती थी और घर भी चलता था माँ के पैसों से।
हीरा की माँ स्कूल टीचर थी नाम – ‘हिंदी’ । हिंदी जिंदा है या यूं कहें कि हिन्दि या फिर हिन्दी ज़िंदा है रुई के फाहे से गिरती हुई उस बून्द – बून्द दवा के
सहारे जो वो छोटे-छोटे शब्द है जो आज की अंग्रेजी दुनियां यदा-कदा हिंगलिश बोलते वक़्त प्रयोग कर लेती है…
हा हिन्दि जिंदा है!

-निकिता

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