My Legacy

फिर भी अच्छा है

Phir-Bhi-Accha-hai-CelebrateLife-Motivation

खिड़की से धूप में खेलते बच्चों को देख रही हूँ। मार्च महीने की धूप है पर गर्म बहुत है। लेकिन बच्चों को अगर देखेंगे तो कह नहीं सकते के धूप भी है। अभीअभी बच्चों की गेंद खो गयी है, एक बुज़ुर्ग उनको समझा रहे हैं के अपने खेल से दूसरे को परेशानी हो खेल ऐसे नहीं खेलना चाहिए कैसे समय का पहिया सबके लिए अलग अलग समय चक्र लाता है पर तब भी बहुत हद तक उम्र का हर दौड़ सबके लिए लगभग एक समान मनोभाव ही पैदा करता है।

ये बुज़ुर्ग इस उम्र के पड़ाव पर जिस बात को कह रहे है, इनको भी इनके किसी किसी ने बड़े जतन से समझाई होगी।

मोबाइल फिर से बज रहा है और मैं खिड़की से हट कर सोफे पर बैठ गयी हूँ | शादी के छः साल बीत चुके है| हमारी सालगिरह है आज। कोई ख़ास दिन हमारे लिय तो नही है पर दोस्त मित्र सगे संबंधियों के लिए बहुत ही खास होता है आज | सुबह से ही शुभकामनाएं मिलने लगती हैं, क्या प्लान है आज का पूछा जाता है।

मुझे शादी का पहला साल जाने क्यूं हर सालगिरह पर याद जाता है। मैं जब इस नए घर में आई थी और हम दोनों ही अब हमसफ़र बन चुके थे। सुबह कैसी अजीब थी, पहली बार पूरे परिवार के लिए उठ कर चाय बनाना और फ़िर देना भी, हँसते मुस्कराते। फ़िर खाना बनाते वक्त भी किचन में मौजूद रहना। खाना परोस कर देना। फिऱ टीवी देखना सबके साथ, फिर चाय

फ़िर शाम को इनके लौटने पर घर की महिलाओं के कहने पर इनका मुझे बाहर सैर के लिए ले जाना। गार्डन को पार करते वक़्त इन्होंने पूछा के गमलो में पानी नही डाला क्यों,, मैं चुप रह गयी,, फ़िर तुमने ये हील वाली सैंडल पहनी क्यूं,, फिर तुमने ये हाफ स्लीव का सूट पहना क्यों। और तुम तीखी सब्जी को तीता क्यों बोलती हो। तब से ही हर शादी की वर्षगांठ पर मैं यही सोचती हूँ के उपहार स्वरूप काश कभी इन क्यों का भी जबाव दे पाती।

घड़ी देखी तो शाम के पूरे पांच बजे है, अभी भी इनके आने में वक़्त है। तभी दरवाज़े पर किसी ने घण्टी बजायी। पड़ोस की ही एक है।

– अदिति

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