My Legacy

संस्कारी पति

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इस महीने की किट्टी पार्टी मेरे घर पर थी, विशेष ये के, इस बार हमें जीवन में पतियों की भूमिका पर बोलना था, और उनके पसंद की दी हुई साड़ी में ही आना था।

मेहमान आने लगे। सब विराजमान होने के बाद पहले तो चाय नाश्ते में रम गए। नाश्ते के मेनू मेरे हस्बैंड ने तय किया था क्योंकि खाना वो बहुत ही अच्छा बना लेते है। सबने उनके खाने की बड़े मन से तारीफ़ की अब किट्टी शुरू हुई और हँसी-मज़ाक़ के साथ थोड़ी बहुत नोक झौक़ के बाद विजेता भी सामने आकर सम्मानित होते रहे। किट्टी की समाप्ति हो चुकि है और हम एकएक कर के अपने पत्तियों की अपने जीवन में भूमिक के बारे में बताने लगे।      

महिलाएं आ रही थीं और अपने पति के बारे में रोचक बातें बता रही थी, कैसे वो उनको किसी काम को करने से नहीं रोकते, मां से भी उनके लिए लड़ लेते हैं। उनको अकेले भी बाहर घूमने की आज्ञा मिली हुई है।मेरी बारी आई तो मैंने भी पहले से झूठ सच मिला कर क्या बोलना है इसकी तैयारी कर ही ली थी

तो बड़े ही प्रभावकारी ढंग से बताया के ये कैसे मुझे खाना बनाने में मेरी मदद ही नही करते, वीकेंड पर दो दिन तक हर टाइम का खाना खुद ही बनाते हैं और निकाल कर खिलाते भी है, मेरा काम बस उन दो दिनों में चाय बनाने और देने भर का ही रहता है, जो चाय की शौकीन मैं, बड़े आराम से कर लेती हूं और खाने के शौक़ीन ये खाना बहुत ही लाजवाब खिलाते है। सच कहूं तो वीकेंड्स का मुझे मंडे से ही बेहद इंतजार होता है।  

तभी मेरे पति ने किचन से आवाज़ लगाई और मै वापस अपने साथ कॉफ़ी का ट्रे लेकर लौटी जिससे सबने जान लिया के कॉफी मेरे पति ने बनाई है और मैं उसे बस लेकर आई हूं। सबने कॉफी पी जो के वाक़ई परफेक्ट बनी थी, सबने कॉफी ख़तम कर के मेरे पति के लिए तालियां बजायी। मैं ख़ुश थी, ये सब मैंने बहुत सोच समझ कर सेट किया हुआ था, स्पीच भी और कॉफ़ी की टाइमिंग भी अखिर पार्टी मेरे घर पर थी तो आकर्षण का केंद्र भी मैं खुद ही बने रहना चाहती थी।         

फ़िर भी पड़ोस में आई एक बेहद पढ़ी लिखी नव विवाहिता मेरा ध्यान खुद ही आकर्षित कर रही थी। वो ही थी जो साड़ी के जगह फ्रॉक में आई थी, जो के उसके हस्बैंड का फ़ेवरेट ड्रेस था , वो क्षमा मांग चुकि थी के वो साड़ी नही पहनतीं। बेहद सुंदर तो वो लगही रही थी, बीच-बीच मे उसके ऑफिस से आने वाले फ़ोन का भी जवाब दे रही थी। एक बड़े कंपनी में एच आर की पोस्ट थी उसकी। हम सबके केंद्र में अब वो ही आ गयी थी, उससे सूनने को सभी उत्सुक थे, बात फिऱ तीज त्योहार पर आ टिकी, आखिर हम महिलाओ को उसके सामने नंबर जो बढ़ाने थे, या फ़िर हाउस वाइफ की भूमिका का गुणगान भी तो करना ही था, किसी न किसी माध्यम से।

उसने बड़े ही साफ़ ठंग से स्वंम का पक्ष रखा के वो व्रत नहीं करती क्यों कि इतना कठिन व्रत नही कर पाती वो। फ़िर तो जैसे हमे मौका मिल गया उसको कमतर करने का। सबने तीज न करने से क्या – क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं, उसको बताना शुरू किया। सब को वो ध्यान से सुनती रही। फ़िर माफ़ी मांगते हुए उसने कहां, के जीवन मे संस्कारी पति कहाँ मिलते है, फ़िर संस्कारी पत्नी भी अब पुरानी सोच है। संस्कारी पत्नी होगी तो सफ़ल व्यक्ति कैसे बनती वो।

उसने जाते जाते कहा के पति तो फिर भी दूसरा मिल सकता है, लेक़िन अगर अपना स्वास्थ्य खराब कर लेगी तो घर को बच्चों को,उसके स्वम के माता पिता को कौन देखेगा? अगर वह बीमार पड़ती है तो पति के काम की व्यस्था के कारण तो वो समय से उसको दावा तक नही दे पाएंगे। ये स्वम् उसके पति का मानना था के उसे दिखावे केलिए व्रत करने की कोई ज़रूरत नहीI वैसे भी वो घर के लिए बहुत अमूल्य है, व्रत करना ही है तो उसे यानी के उसके पति को करना चाहिए।

महिलाएं गेट तक पहुँच चुकि थी, नव विवाहिता का पति उसकी प्रतीक्षा कर रहा था, उसके आते ही कार का दरवाज़ा खोल कर उसको बिठाता है, और पूछता है मैडम मूवी या फिर डिस्को।

इसके जीवन में पति की कितनी सीमित भूमिका थी या श्रेष्ठ भूमिका, मैं तय नहीं कर पा रही थी।

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