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The Lost Lady- Frog Theory and Feminist

The Lost Lady-celebratelife

रागिनी फ़्रॉग थेओरी पढ़ रही थी, मेंढक को अगर खौलते हुए पानी में डाल दो तो कूद कर बाहर आ जाएगा, मगर उसी मेंढक को हल्के गरम पानी में डालो फिर धीरे-धीरे उबलो। बिचारा जान दे देगा, लेकिन गधे की समझ नहीं आएगा की जान जाने वाली है।

रागिनी मन ही मन हँसने लगी। मेंढक और लड़की दोनो एक समान बुद्धिजीवी है। अगर जिंदगी भर का हिसाब पहले ही दे दिया जाय कि स्त्री रूप में जन्म लेने मात्र से ही तुम कितने कलंक की भागिनी और कितने ही दुखो की भोगिनी बन जाओगी, तो कौन स्वीकारेगी ये जन्म। जन्म पूर्व ही ब्रह्मा के सामने सावित्री बन जाएगी और हठ करने लगेगी की धरती पर भेजते हो तो पुरुष रूप में भेजो अथवा आज यही अजन्मी ही मुझे भस्म कर दो।

परन्तु उसी स्त्री को जब धरती पर धीरे-धीरे लाखों तीरों से बेधा जाता है तो मृत्यु तक वो बस यही सोचती रहती है की उसकी महानता रणभूमि में मरने में ही है, भागकर जान बचाने में नहीं।उबल कर मर जाती है उसी मेंढक की तरह! हाय स्त्री! तुम देवी हो, दुर्गा हो, काली भी हो या काली नहीं हो शायद! खड्ग पकड़ोगी पर खुद के लिये नहीं बस समाज के लिए।

 

The lost lady… में चित्रांकन किया गया है रागिनी नामक स्त्री का। मगर नायिका है “स्त्री”। जो एक बेटी, बहन, बहु, भाभी, मामी, चाची, बुआ, मौसी सब है। जिसका आखिरी पराव होगा माँ बनना। कहानी उस नवीन भारत का वर्तमान है, जिसमें स्त्री के लिये एक नये शब्द का प्रयोग काफी प्रचलित है – “feminist”. लेखनी कमजोर रहेगी इस फ़ेमिनिस्ट का मूल्याँकन करने में। प्रयासरत रहेगी ये समझने और समझाने में कि समानता जिसके लिये ये फ़ेमिनिस्ट लड़ रही है आख़िर है किस खेत की मूली….

 

7 thoughts on “The Lost Lady- Frog Theory and Feminist

  1. Good read… Waiting to know more about this feminist…. Hello feminist.. although u r the source of life but for rest of ur liFe everyone teaches u what is ur life…

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