My Legacy

मेरे हीरो: मधुर मेधा

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साधारण वेशभूषा में रहने वाली असाधारण महिला मेधा ताई (पाटकर) मेरी तारीफ की मोहताज नहीँ हैं।नर्मदा की आवाज के रूप में दुनियाभर में पहचानी जाने वाली मेधा पाटकर आज तक कई सम्मानों से नवाजीजा चुकी हैं, फिर भी जमीन से जुड़ा उनका व्यक्तित्व उन्हें मेरा “हीरो” बनाता है। ताई से मिलने का अवसर तो प्राप्त नहीं हो सका, किंतु “महिला सुरक्षा और मुंबई” विषय पर अपने एक लेख के संबंध में उनसे बात करने का अवसर जरूर मिला।

कई दफे फोन की रिंग बजी, पर उठाया नहीँ गया। मन में उथल-पुथल हुई कि बड़ी शख्सियत हैं, शायद अनजान नंबर नहीँ उठाती हों। मगर मुझे अपना काम तो पूरा करना था, सो मुंबई में पैदा हुई, पली-बढ़ी और वर्षों से इस महानगर को करीब से जानने वाली मेधा ताई का नजरिया महत्वपूर्ण था।

कुछ देर रुक कर मैंने दोबारा से फोन लगाया। इस बार फोन उठा पर आवाज ठीक से नहीँ आई।अब मैंने तीसरी दफे फोन लगाया, तो उधर से मेधा ताई की आवाज आई। उन्होंने कहा,”अभी मैं बस में हूं। नेटवर्क ठीक से नहीँ पकड़ रहा।” और निर्धारित समय के बाद फोन करने की बात कह कर उन्होंने फोन रख दिया।

बाद में उन्होंने फोन पर, मेरे लेख से जुड़ी चर्चा की,फिर बातों-बातों में  खुद के बस, ट्रेन, पैदल दिनचर्या की चर्चा की, जिसके दौरान फोन पर आवाज स्पष्ट न हो पाने की अनकही माफी (एक्सक्यूज़) भी शामिल थी। साधारण मुंबईकर जैसी तमाम बातों में उनका निर्मल व्यक्तिव साफ झलक रहा था। मुंबई जैसे शहर में (जहां यात्रा के तमाम लग्जरी साधन मौजूद हों) सिटी (BEST) बस में सफर करना, अनजान फोन उठा कर सम्मानपूर्वक बात सुनना मेरे लिए हर वाकया खास था।

शायद, ताई के अति सरल व्यक्तित्व और मधुर वाणी का ही असर है कि वह आम लोगों के बीच आसानी से घुलमिल जाती हैं और लोग उनसे सहज ही अपना दुःख-दर्द साझा कर पाते हैं।

असाधारण आंदोलन चलाने वाली मेधा ताई का यही साधारण व्यक्तिव उन्हें आम लोगों की पंक्ति से अलग करता है।

-सोनी सिंह


 

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