Fiction

परछाई : सुख तेरा, दुःख मेरा : मंथन

manthan- CelebrateLife

दोपहर में जब प्रियम स्कूल से वापस आई तो प्रियंका हाल में बैठ कर टीवी देख रही थी। आते ही प्रियम बोली ” आज तो मजा आ गया मां। सारे दोस्त मेरी पार्टी के बारे में बात कर रहे थे। मैंने बताया कि कैसे पापा ने पूरी पार्टी की व्यवस्था की थी और कैसे उन्होंने अपने सारे दोस्तों को इन्वाइट किया था। फिर रूक कर बोली ” मां, अगली बार मैं अपने दोस्तों को भी इन्वाइट करुंगी।

प्रियंका ने प्रियम के सर पर हाथ फेरते हुए कहा “बुला लेना, पहले जाकर कपड़े बदल लो और कुछ खा लो।

अब प्रियंका को लग रहा था कि उसे रमेश से बात करनी चाहिए और इस मसले को हमेशा के लिए खत्म कर देना चाहिए।

शाम को रमेश के आफिस से लौटने पर प्रियंका ने प्रियम के जन्मदिन की बात शुरू की। तभी रमेश ने टोकते हुए कहा ” मैं बताना भूल गया कि अगले इतवार को हमें शर्मा जी के घर जाना है। उनकी शादी की सालगिरह है। हम तीनों को इन्वाइट किया है। प्रियंका ने फिर से बात करने की कोशिश की लेकिन रमेश ने फिर से बात बदल दी। अब प्रियंका को लगने लगा था कि रमेश ने जान बूझ कर प्रियम के जन्मदिन का इस्तेमाल किया है। वो अंदर से गुस्से में थी और साथ ही खुद को बहुत कमजोर समझ रही थी।

रात को जब प्रियंका सोने की तैयारी कर रही थी तभी रमेश ने अपनी शर्ट की जेब से एक चिट्ठी निकाली और उसे प्रियंका को पढ़ने को दिया। उसमें हेडक्वार्टर के आफिसर का दस्तखत था और चार नाम लिखे थे जिनमें से एक नाम रमेश का भी था। पत्र में नीचे उत्कृष्ट कार्य के लिए रमेश को सम्मानित करने का फैसला लिया गया था।

पत्र को पढ़ने के बाद प्रियंका को लगने लगा कि उसकी ये सोच कि ” रमेश अपनी सफलता के लिए अपने परिवार का इस्तेमाल कर रहा है,” गलत है। बिना आंखों से आंसू गिराए, प्रियंका ने मन ही मन रमेश को सारी बोला और नाइट लैंप बुझा दी।

Satish - Celebratelife
Satish – Celebratelife

 

 

 

 

 

The writer is passionate about reading and finding more about life. He loves to travel and to know people from different sphere of life.

“Love only blossom when drive with wisdom”

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