Fiction

परछाई : सुख तेरा, दुःख मेरा – भूमिका

परछाई - celebratelife.in

प्रियंका आज छह साल की हो रही थी. सुबह से ही वो बहुत प्रसन्न थी की आज शाम को घर में बहुत लोग आएंगे, पार्टी होगी और मेरा बर्थडे मनाया जायेगा| उठते ही माँ से माथे पर किस किया और “हमेशा खुश रहो” कह कर गले से लगा लिया तुरंत ही प्रियंका ने अपनी माँ को अपनी फरमाइशें सुना दी| माँ आज खाने में पनीर की सब्जी, छोले, भठूरे , पुलाव , राजमा और रसगुल्ले बनेंगे| मैं अपने दोस्तों को पिज़्ज़ा भी खिलाऊंगी| माँ ने कहा, “बेटा पहले अपने पापा से तो मिल ले| शायद प्रियंका आज की ख़ुशी में अपने पापा को भूल ही गयी थी| वो तुरंत बिस्तर से उठी और दौड़ते हुए पापा के कमरे की तरफ गयी| वो जैसे ही कमरे में घुसी, उसने देखा एक बड़ा सा गुलदस्ता टेबल पर रखा है और साथ में एक गिफ्ट बॉक्स भी रखा है| पापा चुपके से दरवाजे के पीछे से आये और प्रियंका को अपनी गोद में उठा लिया|

प्रियंका बोली

“पापा आई लव यू सो मच”

——

खिड़की के पास बैठी प्रियंका अपने छठवें जन्मदिन की ये बात याद कर के रोने लगी| आज प्रियंका की ६ साल की बेटी का जन्मदिन था| प्रियम नाम रखा था उसका प्रियंका और रमेश ने| रमेश रेलवे में नौकरी करता था| सरकारी नौकरी होने की वजह से प्रियंका के पापा ने पचीस लाख रुपए खर्च कर दिए थे शादी करने में| प्रियंका खुद पोस्ट ग्रेजुएट थी और सरकारी नौकरी के लिए तयारी कर रही थी| लेकिन लड़की होने की वजह से उसे अपने सपनो का समझौता करना पड़ा और पापा के आत्म सम्मान के लिए उसके अपने से आठ साल बड़े रमेश से शादी कर ली|

प्रियंका और रमेश में सिर्फ उम्र का ही फासला नहीं था, बल्कि परवरिश भी बहुत अलग थी| प्रियंका जहाँ अपने सपनो को पाने के लिए रिस्क लेने की काबिलियत रखती थी वहीँ रमेश कठिन मेहनत और सीमित इक्षाओं में विश्वास रखता था| ये अंतर दोनों के जीवन में एक खाई की तरह थी जिसमे शयद दोनों ही घुट कर जीने को मजबूर थे| वैसे रमेश ने प्रियंका की वाज़िब मांगों को पूरा करने में कोई कसर नहीं राखी थी, लेकिन मांग वाज़िब है, ये तय करने का अधिकार सिर्फ रमेश के पास था| इस बात से प्रियंका खुद को बहुत कमजोर महसूस करने लगी थी|

प्रियम के छठवें बर्थडे के लिए प्रियंका ने बहुत कुछ सोच रखा था| ठीक अपने छठवें बर्थडे के जैसे, लेकिन रमेश ने अपने कद और पद के अहंकार में बच्चों की पार्टी को बड़ों का गेट टूगेदर बनाने का फैसला कर लिया था| इस पार्टी में रमेश के ऑफिस के लोग, मोहल्ले के लोग और कुछ अनजान लोगों को न्योता भेजा गया था. यहीं से प्रियंका और रमेश के बीच बात बहस में बदलने लगी थी….

– Satish Singh

Satish - celebratelife.in

The writer is passionate about reading and finding more about life. He loves to travel and to know people from different sphere of life.
“The dead don’t speak but the deeds does”

2 thoughts on “परछाई : सुख तेरा, दुःख मेरा – भूमिका

  1. बांध गया मैं प्रियंका और रमेश की उलझनों में, पर कौतुहल है की प्रियम की फरमहिशो का क्या हुआ…
    क्या हुआ प्रियंका के ८वी वर्षगांठ में?
    और प्रियम की ६वी में क्या हुआ?

  2. पढ़ कर पूरा पढलेने का मन है। सोमवार का इंतज़ार है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *