Fiction

परछाई : सुख तेरा, दुःख मेरा : प्रियम का बर्थडे

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रात के बारह बज चुके थे, प्रियम के बर्थडे का केक काटा जा रहा था, सभीगेस्ट जोर जोर से हैप्पी बर्थडे टू यू गा रहे थे| सब लोग खुश थे, सिवायप्रियंका के| प्रियंका सोच रही थी कि वो प्रियम को कैसे आगे आने वालीजिंदगी में समझौते करने के लिए तैयार करे| वो कैसे समझाए कि उसे अपनीजिंदगी में बहुत सारी बातों को नजर अंदाज करना पड़ेगा और बहुत सारीबातों पर ख़ामोशी रखनी होगी|
खैर, लोग जाने लगे, प्रियम को ढेर सारी गिफ्ट मिलीं और फिर वो अपनेगिफ्ट्स को सहेजने में लग गयी| अगले दिन सवेरे किचन में प्रियम के लिएनास्ता बनाते समय प्रियंका को लगा कि वो जो रात में सोच रही थी, वोउसका वहम है|

रमेश ने अपने परिवार के लिए बहुत कुछ किया है, और ये जोसामाजिक सम्बन्ध हैं, इनके होने से ही रमेश को ऑफिस में परेशानी कासामना नहीं करना पड़ता है| ये बात सोचते सोचते प्रियंका इतना खो गई की उसको ध्यान ही नहीं रहा कीवो प्रियम के लिए नास्ता बनाने आयी थी| घड़ी में समय देखते हुए रमेश नेप्रियंका को आवाज़ लगाई, लेकिन तब तक स्कूल की बस दरवाज़े पर आचुकी थी| प्रियंका भागती हुई हाल में आयी और बोली, सॉरी आज मैं नास्ता नहीं बना पाई| रमेश ने प्रियंका की तरफ देखा और बोला, कोई बात नहीं, मैंऑफिस जाते हुए टिफ़िन देता जाऊंगा|

वैसे तो प्रियंका एक अपर मिडिल क्लास से आती थी लेकिन प्रियंका की माँ को अपने समय में बेहद गरीबी का सामना करना पड़ा था| प्रियंका के नाना एक किसान थे और उनके पास जमीनें भी बहुत कम थी| पास के गांव में प्रियंका के पापा की किराने की दूकान थी और वहीं से प्रियंका के नाना अपना राशन लेते थे| प्रियंका के नाना के सरल स्वाभाव और ईमानदारी से प्रभावित होकर प्रियंका के दादा ने खुद से प्रियंका की मम्मी के लिए रिश्ता माँगा था| ये तो स्वाभाविक था की प्रियंका की मम्मी बहुत मेहनती और पाई पाई जोड़ कर रखने वाली औरत थी|इसी बात से प्रियंका के पापा का व्यापार चल पड़ा था और मुनाफा भी अच्छा होने लगा था| फिर जब प्रियंका हुई तब देश एक परिवर्तन से गुजर रहा था, जिसका भरपूर फायदा प्रियंका के पापा ने उठाया और उनका व्यापार काफी अच्छा चल पड़ा था|

प्रियंका के पापा दोनों से बहुत प्यार करते थे और खास कर प्रियंका पर उनका स्नेह कुछ ज्यादा ही था| लेकिन प्रियका की मम्मी ने कभी भी प्रियंका को पैसे पर घमंड नहीं करने दिया था और यही कारण था की प्रियंका एक अपर मिडिल क्लास की होने के बावजूद पैसों की अहमियत समझती थी और ये भी जानती थी की परिवार कैसे चलाया जाता है| लेकिन प्रियम के होने के बाद प्रियंका की इक्षाएं बदलने लगी थी और वो प्रियम को दुनिया का सारा सुख दे देना चाहती थी. वो रमेश में अपने पापा जैसा समझदार आदमी देखती थी और इस वजह से उसने कभी भी रमेश के किसी भी बात पर ऐतराज़ नहीं किया था| लेकिन प्रियम के बर्थडे पर रमेश का इस तरह से व्यवहार करना उसको अच्छा नहीं लगा था|

स्कूल बस के जाने के बाद रमेश किचन में आया और बोला, मैं रात से नोटिस कर रहा हूँ की तुम किसी बात पर परेशान हो| मुझे बता दो, तुम्हारा मन हल्का हो जायेगा| लेकिन प्रियंका इतना कंफ्यूज हो चुकी थी की उसने बात को तबियत ख़राब होने का बहाना दे कर टाल दिया| रमेश अपना और प्रियम काटिफ़िन ले कर ऑफिस चला गया| ऑफिस जाते हुए रमेश प्रियंका के बारे में सोच रहा था, प्रियंका प्रियम के बारे में और प्रियम स्कूल में अपने बर्थडे के क़िस्से अपने दोस्तों को सुनाने में वयस्त थी| उसकी नजर में उसके पापा सेअच्छा पूरे वर्ल्ड में कोई नहीं था| इतना ग्रैंड बर्थडे उसने कभी नहीं मनाया था|

क्या प्रियंका सही सोच रही थी|
क्या प्रियम सही सोच रही थी|
क्या जो रमेश समझ रहा था वो सही था..(रमेश क्या समझ रहा था?)

Satish - celebratelife
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The writer is passionate about reading and finding more about life. He loves to travel and to know people from different sphere of life.

“Love only blossom when drive with wisdom”

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